2025 की शुरुआत में 'थंडेल' के प्रमोशन के दौरान उन्होंने श्रीकाकुलम की तटीय बोली सीखने, उन मछुआरा परिवारों से मिलने जिन पर कहानी आधारित है, और सत्या का इंतज़ार निष्क्रियता नहीं बल्कि प्रतिरोध के रूप में क्यों लिखा गया है — इस पर चर्चा की।
सारांश सार्वजनिक इंटरव्यू से अपने शब्दों में लिखे गए हैं। कोई भी उद्धरण शब्दशः नहीं दिया गया है।